प्रश्न कुंडली की सहायता से भविष्य कथन में के पी का एक अनुपम योग दान-हमारे पारंपरिक ज्योतिषशास्त्र के अनुसार यदि किसी जातक के पास उसकी जन्म कुंडली हो या न हो अथवा कई प्रश्न ऐसे होते है जिनका उत्तर जानने के लिए प्रश्न कुंडली ही जरुरी होती है.जैसे नौकरी कब मिलेगी यह तो जन्म कुंडली से भी बताया जा सकता है किन्त्तु कहाँ मिलेगी ,किस क्षेत्र में मिलेगी ? या जातक के पास दो नौकरी के विकल्प हैं कहाँ नौकरी करना बेहतर होगा ? प्रश्न कुंडली जरुरी हो जाती है. ऐसी परिस्थिति में और प्रश्न द्वारा जातक को बतलाया जाता है.
परन्तु कई बार ऐसा भी होता है की एक जातक के विवाह कब होगा प्रश्न पूछने के कुछा समय के बाद दूसरा व्यक्ति अपने तलाक के बारे में जानना चाहता है . इस बीच न तो ग्रह स्थिति और न लग्न की स्थिति बदलती है . क्या एक ही प्रश्न कुंडली से विवाह और तलाक के विषय में बतलाना सही होगा ?
इस व्यवहारिक समस्या को सुलझाने के लिए जातक को १ से २४९ के बीच के अंक को चुनने के लिए कहा जाता है और उस अंक से प्रश्न के लग्न की राशी ,तथा उसके अंश ,कला ,विकलाका निर्णय किया जाता है .इस विधि से एक ही समय में अनेक प्रश्नों को सरलता से सुलझाया जा सकता है.
प्रश्नों का उत्तर देने में तात्कालिक ग्रहों (रूलिंग प्लानेट्स ) का उपयोग किया जाता है. ये निम्नलिखित हैं -
१- प्रश्न के समय जो लग्न है उस लग्न का स्वामी ,
२- लग्न स्वामी का नक्षत्र स्वामी ,
३-चन्द्र जिस राशी में है -उस राशी का स्वामी ,
४ - चन्द्र जिस नक्षत्र में है उसका नक्षत्र स्वामी
५ -जो वार है उसका स्वामी
उपरोक्त इन पांच ग्रहों को साधारण भाषा में आर .पी . कहा जाता है.
इन की सहायता से होने वाली घटना का सही समय /दिनांक निकाला जा सकता है .
अपेक्षित घटना कौनसी दशा /अंतर /प्र्त्यांतेर में होगी .जातक का सही जन्म समय का पता करना आदि अनेक समस्याओं का समाधान सरलता से किया जा सकता है .
अंकल.... आपको मेरा कोटि कोटि प्रणाम और नमस्कार.... आप की बात बिलकुल सही है... लेकिन जन्म कुंडली, दशा महादशा अंतर दशा और प्रश्न कुंडली से भविष्य देखे तो बहु अच्छा फल मिलता है......पंडित प्रभुलाल पी.वोरिया का जय द्वारकाधीश
ReplyDeleteधन्यवाद !
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